पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा के कद्दावर नेता और बाजपेई सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने टीएमसी का दामन थाम लिया है। सिन्हा ने टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन सुदीप बंदोपाध्याय और सुब्रत मुखर्जी की मौजूदगी में सदस्यता ली। यशवंत सिन्हा केडीएमसी में शामिल होने के बारे में जानकारी एक प्रेस कांफ्रेंस कर दी गई। मौके पर मौजूद सुब्रत मुखर्जी ने यशवंत सिन्हा के शामिल होने पर खुशी जाहिर की और कहा कि यशवंत सिन्हा हमारे साथ आए, अगर ममता बनर्जी पर साजिश के तहत नंदीग्राम में हमला नहीं होता तो वह खुद यहां मौजूद होती।

टीएमसी नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने बताया की यशवंत सिन्हा टीएमसी में शामिल होने से पहले ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाकात करने गए थे। यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश इस वक़्त संकट में है, संवैधानिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही हैं। उन्होंने कहा प्रजातंत्र की ताकत प्रजातंत्र की संस्थाओं में होती है। उन्होंने न्यायपालिका को भी कमजोर होने वाले संस्थानों में से एक कहा और इससे हमारे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।

यशवंत सिन्हा ने अटल जी के कार्यकाल को याद करते हुए कहां कि अटल जी के समय बीजेपी सर्वसम्मति में विश्वास करती थी। पर मौजूदा सरकार केवल कुचलने और जीतने में विश्वास करती हैं उन्होंने सवाल उठाया की आज बीजेपी के साथ कौन खड़ा है अकाली दल और बीजद ने भी बीजेपी से नाता तोड़ लिया है।

यशवंत सिन्हा मोदी सरकार की आलोचना करते रहे हैं। यशवंत सिन्हा ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी एनडीए के खिलाफ कैंपेन चलाया था। उत्तर प्रदेश के चुनावों के दौरान भी अखिलेश यादव के साथ मंच साझा किया था।