शनिदेव को शास्त्रों के अनुसार कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है ऐसे में जो भी भक्त इनके प्रिय वस्तु काला तिल काला कपड़ा अथवा लोहा चढ़ाता है तो यह मनचाहा वरदान देते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं लेकिन इनको काली वस्तुएं पसंद है यह किस आधार पर कहा गया है आज इसके बारे में भी चर्चा करेंगे पौराणिक कथाओं के अनुसार इनके बारे में बताया जाता है कि शनि देव नौ ग्रहों में से एक ऐसे तेजस्वी ग्रह है जो अगर किसी के कुंडली में आ जाते हैं तो उसका जीवन दुखों से भर जाता है और अगर अपनी कृपा बरसा देते हैं तो सुखमय हो जाता है इसके साथ-साथ वह न्याय के देवता और कर्म फल दाता के नाम से भी जाने जाते हैं जो अच्छे बुरे कर्मों का फल देते हैं ऐसा माना जाता है कि शनिदेव स्वभाव में बेहद क्रूर और गुस्से वाले हैं मंदिरों में भी शनिदेव की प्रतिमा काले रंग की ही बनाई जाती है उन्हें काली वस्तु है बेहद प्रिय है जैसे आपको बता दें. यह भी पढ़ें- भविष्य में बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थ स्थल हो जाएंगे गायब

प्रिय वस्तु: काले वस्त्र, उड़द दाल, काला तिल, लोहा, सरसों, तेल, आदि.

अगर बात करें इनके जन्म की तो इनके जन्म की भी एक कहानी है जिसे कुछ लोग नहीं जानते सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संध्या से हुई थी जिससे उनके 3 संतानी हुई जिनका नाम था मनु, यमराज, और यमुना, यह तीनों अपने अपने जगह पर समय समय से विराजमान हो गए लेकिन शनिदेव का अभी तक कोई नामोनिशान नहीं था लेकिन आपको बता दें कि सूर्य देव का तापमान इतना अधिक था कि देवी संध्या उसे सहन करने में असमर्थ थी. शनि देव काले वस्तु पसंद हैं जिसकी वजह से वह अपने पिता विश्वकर्मा के पास में और उन्होंने अपनी व्यथा अपने पिताजी को सुनाई उन्होंने कहा पुत्री मैं कुछ नहीं कर सकता लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा अवश्य दे दिया जिससे संध्या अपने छाया को उत्पन्न कर सकती थी बस फिर क्या था छाया वह औषधि पीकर अपने एक छाया प्रतिरूप को जन्म दिया जिनका नाम छाया था.

उसके बाद संध्या घोर तपस्या के लिए सूर्य लोक से निकल गई और छाया बच गई जो देखने में एकदम देवी संध्या की तरह ही थी कुछ भी अलग नहीं था जिसके कारण वश सूर्यदेव भी उनको पहचान नहीं पाए और तभी छाया को एक संतान की प्राप्ति हुई जो कि स्वयं शनिदेव थे लेकिन इसका किसी को भान नहीं था छाया अपने तपस्या में ही लीन रहती थी वह महादेव की घोर तपस्या करती थी जिसकी वजह से वह अपने बच्चे का देखभाल नहीं कर पाती थी लेकिन जैसा कि वह महादेव की तपस्या करती थी.

तो शुरु से ही महादेव की कृपा शनिदेव पर रही लेकिन जब शनिदेव पैदा हुए तो वह बेहद कमजोर और कुपोषित और काले रंग के थे जिसको सूर्यदेव ने देखते ही ठुकरा दिया और उन्होंने कहा कि मेरी संतान हो ही नहीं सकती इतनी कुरूप तभी शनिदेव की कुदृष्टि सूर्यदेव पर पड़ी जिसकी वजह से सूर्य देव के पूरे शरीर पर कुछ हो गया तो था. वह कुरूप दिखने लगे फिर सूर्यदेव भागे भागे महादेव के पास गए और उन्होंने अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगी महादेव ने उन्हें क्षमादान दे दिया और फिर वह पहले की तरह सुंदर और स्वस्थ हो गए और अपने पुत्र से भी क्षमा मांगी। आपको बता दें कि महादेव के वरदान से ही शनिदेव को कर्म फल दाता और न्याय के देवता की उपाधि प्राप्त हुई वह सबको अपने (God of justice) कर्मों का फल उसके कर्म के अनुसार देते हैं। और खबरे जानने के लिए हमारी वेबसाइड "Thebharatpress.com" से जुड़े रहे।

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