पश्चिम बंगाल की चुनावी हवा रोज अपने साथ कुछ न कुछ नया लेकर आती है। पार्टी के नेताओं द्वारा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला जारी है। इसी बीच 7 अप्रैल के दिन चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से 3 अप्रैल के भाषण को लेकर एक नोटिस भेजा और 48 घंटों में जवाब की मांग की। चुनाव आयोग ने 3 अप्रैल को हुगली में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए दीदी के भाषण को आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया है।


ममता बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने हुगली जिले के तारकेश्वर में जनसभा को संबोधित करते हुए अपने भाषण में मुस्लिम वोटरों को एकजुट हो कर टीएमसी के लिए वोटिंग करने को कहा था। ममता के कहे इन शब्दों पर भाजपा के नेता व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने 6 अप्रैल को चुनाव आयोग को शिकायत की। जिसके बाद 7 अप्रैल को चुनाव आयोग ने ममता को नोटिस भेजकर जवाब की मांग की है।


इस दौरान ममता बनर्जी के कहे शब्दों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने 6 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा दीदी मुस्लिमों को एकजुट होकर टीएमसी को वोट देने की अपील कर रही हैं। यह बात साबित करती है कि दीदी पश्चिम बंगाल में अपनी हार स्वीकार कर चुकी हैं तभी तो वह मुस्लिम वोटरों को एकजुट हो जाने की बात कह रही हैं। मोदी ने कहा अगर हमने हिंदू वोटरों को एकजुट हो जाने की बात कही होती तो अब तक हमारे चर्चे में कई संपादकीय छप गए होते।