वित्त वर्ष 2021-22 का बजट राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में प्रस्तुत किया यह यूपी का पहला डिजिटल बजट था। सरकार का जोर उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास एवं आत्मनिर्भरता पर था। अगले वर्ष यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं यह योगी सरकार के 5 वर्षों के कार्यकाल का आखिरी बजट था।

किसानों पर मेहरबान सरकार

किसान आंदोलन की बीच पेश किए गए बजट में यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने किसानों को लुभाने की कोशिश की है। किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा हेतु 700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कम दरों पर कृषि लोन का भी ऐलान किया। कृषि मंत्री ने बजट पेश करते हुए सदन में कहा, अधिक उत्पादकता वाली फसलों को चिन्हित किया जाएगा और ब्लॉक स्तर पर कृषि उत्पादन संगठनों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का आवंटन प्रस्तावित है।

युवाओं को लुभाने का प्रयास

वित्त मंत्री ने प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को मुफ्त टैबलेट दिए जाएंगे। साथ ही साथ उन्होंने कहा बेरोजगार युवाओं की काउंसलिंग की जा रही है, अभी तक 52000 युवाओं को इसका लाभ मिला है। अब प्रदेश के अन्य जनपदों में भी ऐसे ही सेंटर्स बनाए जाएंगे।

राम जन्म भूमि के लिए 140 करोड  रुपये 

राम जन्म भूमि के विकास के लिए 140 करोड रुपये आवंटन का प्रस्ताव रखा है। लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के निर्माण हेतु 50 करोड़ की व्यवस्था बजट में की गई है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना खन्ना ने कुल 55,0270 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 37,410 करोड रुपये ज्यादा है। वित्त मंत्री खन्ना ने शेर "यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी लेकर चिराग जलता है" के साथ बजट भाषण को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण सरकार की राजस्व प्राप्तियां प्रभावित रही लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा प्रभावी वित्तीय अनुशासन लागू किया।