30 अप्रैल की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर कोरोना के दौरान ऑक्सीजन, बेड, दवा और प्लाज्मा आदि से संबंधित पोस्ट कर जानकारी देने वाले लोगों पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और डीजीपी को निर्देश दिया कि अगर सरकार सोशल मीडिया पर दी जानकारी को लेकर कार्यवाही करती है तब कोर्ट अवमानना का मामला चलाएंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन को लेकर अलग-अलग तय की गई कीमतों पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार को अलग-अलग कीमत पर वैक्सीन देने के पीछे क्या तर्क है। केंद्र जल्द से जल्द इसे लेकर वैक्सीन निर्माताओं से बात करे व इसके पीछे का तर्क जाने। साथ ही केंद्र से सवाल किया की आखिर केंद्र वैक्सीन की 100 फीसदी डोज क्यों नहीं खरीद सकता। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने सवालों को जारी रखते हुए कहा कि रेमडेसिवीर जैसी दवाइयों को कब तक उपलब्ध कराया जाएगा। हाल ही में जरूरत पड़ने पर झारखंड को रेमडेसिवीर बांग्लादेश से मंगवानी पड़ी थी। 


30 अप्रैल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर एक के बाद एक सवालों की लड़ी सी लगाते हुए केंद्र के पसीने निकाल दिए। कोर्ट ने देश में चल रही संकट की घड़ी में  स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं को लेकर केंद्र पर सवाल उठाया। उन्होंने ऑक्सीजन के मुद्दे के बारे में पूछा। ऑक्सीजन की आपूर्ति किस तरह की जा रही है, राज्यों को टैंकर और सिलेंडर किस तरह उपलब्ध कराया जा रहा है, बाहर से कितना ऑक्सीजन मिलने वाला है, कोरोना को काबू करने के लिए आगे की क्या रणनीति है, लॉकडाउन को लेकर क्या योजना है। साथ ही 18 - 44 वर्ष के लोगों के लिए टीकाकरण के मसले में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल पूछा कि जो लोग इंटरनेट से जुड़े हुए नहीं हैं, उनके लिए इस आयु के लोगों के लिए टीकाकरण को लेकर क्या रणनीति है, ऑफलाइन मोड के लिए सरकार की क्या तैयारियां है। 


सुप्रीम कोर्ट ने देश में कोरोना से मचे बवाल को देखते हुए बीते दिनों ही कोविड से जुड़े गंभीर मुद्दे की स्थिति का स्वत संज्ञान लिया था। कोर्ट ने आज की सुनवाई में कहा कि उन्होंने देश में चल रही स्थिति को देखते हुए विभिन्न मुद्दों की पहचान की है और सुनवाई का उद्देश्य राष्ट्र हित के मुद्दों को पहचानना और संवाद की समीक्षा करना है।