महामारी के मुश्किल दौर में आज मनुष्य बहुत कुछ खो रहा है, कोई अपनी पसंदिदा चीज खो रहे हैं तो वहीं कई अपने करीबी लोगों को खो रहे हैं। परिस्थिति इतनी खराब चल रही है कि मनुष्य अपनी मनुष्यता भी खोता नज़र आ रहा है। अस्पतालों को इस समय मंदिर का दर्जा दिया जा रहा है और वहाँ काम करने वाले को भगवान का क्योंकि इस समय हर दूसरे व्यक्ति को उनकी ज़रूरत है। ऐसा केवल अभी ही नहीं माना जा रहा बल्कि अस्पतालों को हमेशा से ही सबसे पहला स्थान दिया गया है। लेकिन अब देश की ऐसी हालत देखते हुए कई अस्पताल इसका नाजायज फायदा उठा रहे हैं। मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ के रामा मेडिकल कॉलेज का है। जहां कॉलेज के प्रबंधन ने मृतक का शव घर वालों को देने से इन्कार कर दिया, अस्पताल ने मृतक के पिता से 54 हजार रुपए देने को कहा लेकिन पिता के पास पैसे ना होने के कारण अस्पताल ने शव देने से इन्कार कर दिया।

हापुड़ के पिलखुवा में रहने वाले नितिन गोयल की 4 मई की रात रामा मेडिकल कॉलेज में कोरोना से मौत हो गई। उसके अगले दिन जब पिता बेटे का शव लेने अस्पताल आए तो उन्हों 54 हजार का बिल थमा दिया। पिता के पास इतने पैसे ना होने पर अस्पताल ने शव लौटाने से इन्कार कर दिया। इन सब के बाद जब धौलाकुआं के एसडीएम अरविंद द्विवेदी ने अस्पताल के प्रबंधन से बात की और कहा 23 वर्षीय नितिन के इलाज में जितना भी खर्चा लगा था सब मैं दूंगा, आप लोग मृतक के शव को घर वालों को सौंप दीजिए। लेकिन ये कहने पर भी अस्पताल प्रबंधन नहीं मानाता है, 35 हजार रुपए लेने के बाद ही शव को लौटाया गया। साथ ही डीएम अनुज सिंह ने मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की जाँच के लिए आदेश दिए और रामा मेडिकल कॉलेज के साथ दो अन्य कोविड अस्पतालों में मेजिस्ट्रेट तैनात किया। जिनका काम अस्पताल में मरीजों के लिए हर चीज़ को देखने का होगा बेड, ऑक्सीजन, मरीजों को ऐडमिट करना और मृतक के शव को उनके घर तक पहुंचाना होगा। अस्पताल की ऐसी हरकत पर आज हर कोई शर्मिंदा है। ऐसा केवल एक ही अस्पताल का हाल नहीं, आज कल हर जगह‌ और ज्यादातर अस्पतालों में ऐसी हैवानियत सुनने में आ रही है। लोग इस समय का फायदा उठाते नज़र आ रहे हैं। औरों की मदद करने के बजाय लोग फायदा उठा रहे हैं।