शुभी कि बनी मेहंदी का रंग इतना चढ़ा कि अमेरिका और न्यूयॉर्क में भी इस कि चर्चा होने लगी है। आत्मनिर्भर बनने के बाद, शुभी ने अब अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अभियान शुरू किया है। गंगा के किनारे स्थित भदैनी क्षेत्र कि रहने वाली शुभी अग्रवाल ने सात समुंदर पार आज अपने बगीचे में लगाई मेहंदी के रंग फेला दिया हे।

शुभी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की, जहाँ से शुभी बी.कॉम पूरा करने के बाद अपने घर लौट आई। उसने अपने पिता के पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए काम करना शुरू किया। शुभी के पिता लकड़ी के शिल्पकार हैं। पिछली चार पीढ़ियों से लकड़ी के खिलौने का व्यापार करते हैं। लेकिन शुभी पारंपरिक तरीके से कुछ करना चाहती थी और इस इच्छा के कारण, आज उसकी पहचान सात समुंदर पार भी हो गई है।

आज शुभी द्वारा बनाई गई मेहंदी अमेरिका भी जा रही है, वह भी एक ऑर्डर के रूप में। शुभी के गाँव वाले घर के बगीचे में मेहंदी के पेड़ लगे हैं, जहाँ से शुभी को नए व्यवसाय का विचार आया। शुभी ने बगीचे से पत्तियों को तोड़कर पीसकर मेहंदी पाउडर बनाने के बाद अपने कुछ विदेशी दोस्तों को दिखाया जो उन दिनों काशी घूमने आए थे। यह मेहंदी महिलाओं, शुभी के विदेशी दोस्तों ने देखा और उन्होंने इसकी मार्केटिंग शुरू कर दी। पहले शुभी को नॉर्वे से मेहंदी का ऑर्डर मिला। इसके बाद शुभी ने काम को आगे बढ़ाने के लिए सोचा।

इस योजना के तहत, शुभी ने पहले गाँव की महिलाओं को जोड़ा और फिर शहर में मेहंदी पाउडर की पैकिंग शुरू की। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, शुभी ने महिलाओं की एक श्रृंखला बनाई और आज शुभी कि मांग अमेरिका में भी हो रही है। कई बार कामयाबी के लिए बहुत छोटी शुरुआत ही काफ़ी होती है।