आज Saheed Diwas के मौके पर आजाद भगत सिंह के बलिदान को याद करके उनको श्रद्धांजलि दी जा रही है साथ ही उनके जीवन से जुड़े उन तमाम पहलुओं पर नजर डाले जा रहे हैं। जो लोग उनके जीवन से रूबरू नहीं है। आजाद शहीद भगत सिंह ने महज 23 साल की उम्र में ही मां भारती की आजादी के लिए और मां भारती का दामन बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

भगत सिंह में बचपन से ही देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी अगर कोई उनसे उनका नाम पूछता तो वह अपना नाम भगत सिंह ना बताकर आजाद भगत सिंह बताया करते थे या भारतीय बताया करते थे। उनके मन में देशभक्ति की भावना और मातृप्रेम से ओतप्रोत वाले भगत सिंह थे। और उनके इसी जज्बे को देखकर देश के युवाओं को भी देश के प्रति समर्पण भाव और लड़ने की प्रेरणा मिली। आज से लगभग 90 साल पहले महान देशभक्त भगत सिंह को जो कि एक महान स्वतंत्रता सेनानी और एक क्रांतिकारी वीर थे इनको ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी की सजा सुना दी गई थी।

इनके साथ साथ इनके दो मित्र सुखदेव और राजगुरु भी शामिल थे जिन्होंने हंसते हंसते अपनी जान गवा दी। लेकिन जाते जाते हैं उन्होंने यह सिखा दिया की दुश्मन को धूल कैसे चटाया जाता है। इसलिए इस 3 लोगो की शहादत को याद करने के लिए हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है और भारत के उन महान सपूतों को याद किया जाता है।जिन्होंने आजादी पाने के लिए और आजादी दिलाने के लिए और आजाद भारत के लिए अपनी बेशकीमती जान की भी परवाह नहीं की। भगत सिंह का स्वतंत्रता संग्राम में एक बड़ा रोल था जिसमें उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

भगत सिंह बचपन से ही आजाद सोच के इंसान थे और उनको ब्रिटिश सरकार का यह रूल अच्छा नहीं लगता था कि कोई भी उन को दबाकर उनके ही धरती पर क्यों रखे। लेकिन भगत सिंह शांत स्वभाव के साथ-साथ एक विद्रोही दिमाग के भी थे जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के कोर्ट में जाकर बम फेंक दिया यह कोई मामूली बात नहीं थी। और हजारों ब्रिटिशर्स मारे गए थे जिसके मद्देनजर ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह को फांसी की सजा सुना दी। और उन्होंने फांसी चढ़ते चढ़ते फांसी के फंदे को चूम लिया और इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते लगाते शहीद हो गए।

व्यक्तिगत जीवन

अगर भगत सिंह के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वह हमेशा से ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहने वाले थे उनको (Azad Bhagat singh) संसार के मोह माया से कोई मतलब नहीं था अगर दिमाग में कुछ चलता था तो बस वह आजादी थी। और ब्रिटिश सरकार को भारत से भगाना था। हालांकि जब उनके माता-पिता ने उन पर शादी का दबाव बनाया तो वह घर छोड़ चले गए और कानपुर में अपना बसेरा बना लिया उन्होंने कहा कि अगर मैं इस गुलाम भारत में शादी करता हूं तो मेरे दुल्हन की मौत हो जाएगी।

इस तरह आगे चलकर उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का दामन थाम लिया। उस टाइम भगत सिंह जलियांवाला बाग हत्याकांड से इतनी परेशान थी कि उन्होंने घटनास्थल का दौरा करने के लिए स्कूल तक बंद किया था स्कूल में वह एक शानदार एक्टर थे। 
Read this: 

ऐसा क्या हुआ था 30 साल पहले कि आज यूक्रेन दूसरे देशों से मदद मांगने पर मजबूर है?

शीला दीक्षित के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण किस्से!

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातें।