भारत कोरोना की वैक्सीन को लेकर जश्न के मूड में है। टेलीविजन पर चल रही वैक्सीन की खबरों का बैकग्राउंड म्यूजिक सुनिए| इसे सुनकर आपको ऐसा लगेगा जैसे हमने विश्वविजय कर ली हो। इस बीच खबरों को मसाला बनाने का काम विपक्ष ने भी कर दिया है। कोरोना को लेकर वैक्सीन के मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है | विपक्ष के नेताओं ने अजीबोगरीब टिप्पणियों से बीजेपी की राह आसान कर दी है तो वहीं वैक्सीन से जुड़े बड़े सवाल अब अखिलेश यादव के बयान की आड़ में छिपा लिए जा रहे हैं | हाल ही में अखिलेश यादव ने बयान दिया कि वह "बीजेपी" की वैक्सीन नहीं लगवाएंगे| इस बयान ने विपक्ष का क्या किया पता नहीं लेकिन घर- घर “बीजेपी की वैक्सीन” जैसा प्रचार मुफ़्त में पहुँच गया। मीडिया और बीजेपी के प्रचार को एक्सपर्ट वैक्सीन राष्ट्रवाद का नाम दे रहे हैं| विपक्ष इसी बात से डर रहा है कि इस प्रकार के प्रचार से बीजेपी को वैक्सीन राष्ट्रवाद फैलाने का मौका मिलेगा और उसकी जड़ें और मजबूत होंगी।

भारत सरकार ने कोरोना की जिन दो वैक्सीनों  को मंजूरी दी है उनमें सीरम इंस्टिट्यूट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेन्का के सहयोग से बनी कोविशील्ड है और दूसरी वैक्सीन हैदराबाद स्थित भारत बाइयोटेक और इंडियन काउन्सल फॉर मेडिकल रिसर्च की के सहयोग से बनी कोवैक्सीन है। इन दोनों वैक्सीनों को अभी आपातकाल  उपयोग  के लिए उपयोग की अनुमति दी गई है|  

इंडियन काउन्सल फॉर मेडिकल रिसर्च  (आईसीएमआर) के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव ने रविवार को कहा था कि ‘कोवैक्सीन' में ब्रिटेन में मिले  वायरस के नए स्ट्रेन के अलावा  अन्य प्रकारों से भी निपटने क्षमता मौजूद है।  यही बात  टीके को मंजूरी दिये जाने का एक प्रमुख आधार है|  उन्होंने यह भी माना था कि टीके की प्रभाव क्षमता के बारे में अभी कोई स्पष्ट डेटा उपलब्ध नहीं है|  एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है  कि भारत बायोटेक के टीके को सिर्फ ईमर्जन्सी  की हालत में  ‘बैकअप' के रूप में मंजूरी दी गई है|  अगर मामलों में बढ़ोतरी होती है तो हमें टीके की बड़ी खुराक की जरूरत हो सकती है।  इसलिए भारत बायोटेक के टीके का इस्तेमाल किया जा सकता  है|  आपातकालीन उपयोग की बात को स्पष्ट करते हुए केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि  इसके तहत जिसको भी COVAXIN लगाई जाएगी, उसको ट्रैक और मॉनिटर बिल्कुल वैसे  किया जाएगा जैसे ट्रायल में शामिल लोगों को टीका लगाकर किया जाता है| 

 अब तक की जानकारी के मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन के करीब 80 मिलियन डोज़ तैयार हैं | COVISHIELD दो डोज़ की वैक्सीन है. पहली डोज़ देने के बाद दूसरी डोज़ 4 से 6 हफ़्ते के बीच देनी होगी| इतने बड़े उत्पादन से यह संभव  है कि  इसका वितरण जल्द शुरू हो जाए | अडार पूनवाला इसकी कीमत एक हजार रुपए तक बता रहे हैं| यानि दो डोज़ की कीमत 2000 रुपए तक होगी| 

इस बीच वैक्सीन को लेकर प्रतिक्रियाएँ आने लगी हैं | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जनवरी को नेशनल मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव में उद्घाटन भाषण कार्यक्रम में कहा कि देश के वैज्ञानिकों ने दो कोरोना वैक्सीन को विकसित करने में सफलता पाई है| उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होगा. इसके लिए, देश को अपने वैज्ञानिकों और टेक्कनिशियन  के योगदान पर गर्व है.''  इसके साथ ही उन्होंने एक ट्वीट भी किया कि देश जल्द ही कोरोना मुक्त हो जाएगा|  स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन का कहना है कि पहले फेज में तीन करोड़ लोगों तक वैक्सीन दी जा सकती है| इसमें फ्रन्टलाइन वर्कर और डॉक्टरों  के अलावा बच्चों को भी वैक्सीन देने की बात कही जा रही है| उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक से दो हफ्तों में यह वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी| सरकार वैक्सीनों की खरीद करेगी और फिर इसे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

लेकिन कहानी इतनी भी आसान नहीं है| दोनों में से एक वैक्सीन यानी कोवैक्सीन विवादों के घेरे में आ गई है| दरअसल एक्सपर्ट और विपक्ष इस वैक्सीन को लेकर यह कह रहे हैं कि इसे जल्दबाजी में लाया जा रहा है |  कहा ये जा रहा है कि कोवैक्सीन  जब अभी भी तीसरे  चरण के ट्रायल में है तो उसे तुरंत अनुमति देने की जरूरत क्यों आन पड़ी?

 हेल्थ एक्सपर्ट यह मांग कर रहे हैं कि सरकार टीके के दावे की प्रामाणिकता के सबूतों को सार्वजनिक यानी  पब्लिक करे| उनका कहना है कि यह दावा किस आधार पर किया जा रहा है कि वैक्सीन नए स्ट्रेन पर भी उसी क्षमता के साथ असरदार होगी ? ऑल इंडिया ड्रग्स एक्शन नेटवर्क ने भी ऐसा ही सवाल पूछा है| सवाल वाजिब हैं|  लेकिन  यह आप तय करिए कि किसकी बात को देखा जाए। 

 विपक्ष के नेता शशि थरूर और जयराम रमेश ने सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं| उनका आरोप है कि सरकार ने वैक्सीन को अनुमति देने में इंटरनेशनल  प्रोटोकॉल को पालन नहीं किया है| इस बीच सपा नेता अखिलेश यादव ने एक टिप्पणी की, उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की वैक्सीन नहीं लगवाएंगे| हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह बात वह वैज्ञानिकों के बारे में नहीं बल्कि बीजेपी की कार्यशैली के बारे में कह रहे थे| हरियाणा के मंत्री अनिल विज के वैक्सीन लगाने के बाद भी कोरोना संक्रमित हो जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए| अखिलेश ने कहा कि अगर राजनीतिक पार्टियों  ने राय दी है तो सरकार उनकी शंका का समाधान करे| 

भारतीय मीडिया ने अखिलेश यादव के इस बयान को हाथों हाथ लिया और जरूरी सवालों को डस्टबिन में डाल दिया| भाजपा नेताओं के बयानों में  देश और राष्ट्रहित के नेरटिव के आगे विपक्ष के सवालों को खत्म करने की कोशिश दिखती है | स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने विपक्ष के आरोपों को शर्मनाक बताया है| वहीं जेपी नड़ड़ा ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को देश कि किसी भी चीज पर गर्व नहीं है| आप इन ट्वीट्स को देखिए और इनमें विपक्ष की चिंताओं या सवालों के जवाब ढूंढ लीजिए। जवाब मिले तो  बताइएगा क्योंकि हम इनमें नहीं ढूंढ पाए| हालांकि निंदा कर रहे सभी नेता यह बात भूल गए कि कैसे उनकी पार्टी गोबर और गउमूत्र में  कोरोना वायरस का समाधान ढूंढ रही थी| 

नेताओं से ज्यादा जरूरी है कि भारत बायोटेक ने क्या कहा | आरोपों पर भारत बायोटेक ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि वह देश में अन्य वैक्सीनों का भी उत्पादन करते हैं और उनपर अनुभवहीन होने का आरोप ना लगाया जाय | उन्‍होंने कहा कि हमारे ऊपर सवाल उठाना गलत है क्योंकि हम बहुत पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं। एक दूसरी कंपनी ने हमारे बारे में कहा कि हमारी वैक्सीन पानी की तरह सुरक्षित है, ऐसा कहना बहुत गलत है ( सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने रविवार को यह टिप्पणी की थी). वैक्सीन की प्रभाविकता के डेटा को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्‍होंने कहा कि वैक्सीन के प्रभावी होने का डेटा मार्च तक उपलब्ध होगा। सवाल यही है कि क्या सरकार मार्च तक इंतजार नहीं कर सकती थी? क्या यह जल्दबाजी में उठाया गया कदम नहीं है? देश में फिलहाल वैक्सीन को लेकर यही घमासान मचा हुआ है| आप अगर इससे जुड़ी खबरें देख रहे हैं तो दोनों पक्षों को ध्यान से सुनिएगा| विपक्ष के सवाल अगर जायज हों तो ध्यान रखिएगा कि  पक्ष के जवाब भी ऐसे मिलें जो भटकाऊ ना हों| जाते जाते एक सलाह  ये लेते जाइए कि सवाल आपका अधिकार है और जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी | अपने सवालों को टटोलकर जवाब मांगेंगे तो सरकार असहज हो सकती है लेकिन सरकार की इस असहजता से देश का लोकतंत्र मजबूत होता है|