नवरात्रि का यह त्योहार हमारे भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसका उल्लेख पुराणों में भी है। हालांकि पुराणों में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में एक वर्ष में चार बार नवरात्रों का उल्लेख किया गया है, लेकिन चैत्र और आश्विन माह के नवरात्रों को प्रमुखता से मनाया जाता है। तंत्र-मंत्र की साधना के लिए शेष दो नवरात्रों को करने का विधान है। इसलिए, आम लोगों के जीवन में उनका कोई महत्व नहीं है। नवरात्रि के दौरान, देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों में महाशक्ति की पूजा कि परंपरा है, जिन्हें नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है।

13 अप्रैल, मंगलवार: चैत्र नवरात्रि शुरू, घटस्थापना

14 अप्रैल, बुधवार: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी पूजा

15 अप्रैल, गुरुवार: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा पूजा

16 अप्रैल, शुक्रवार: चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन - मां कूष्मांडा पूजा

17 अप्रैल, शनिवार: चैत्र नवरात्रि का पाँचवाँ दिन - माँ स्कंदमाता पूजा

18 अप्रैल, रविवार: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन - मां कात्यायनी पूजा

19 अप्रैल, सोमवार: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन - मां कालरात्रि पूजा

20 अप्रैल, मंगलवार: चैत्र नवरात्रि का आठवाँ दिन - माँ महागौरी की पूजा, 

21 अप्रैल, बुधवार: रामनवमी, भगवान राम का जन्मदिन।

22 अप्रैल, गुरुवार: चैत्र नवरात्रि पारन

कलश स्थापना मुहूर्तअ-

अभिजीत मुहूर्त :- सुबह 11 बज कर 56 मिनट से दोपहर 12 बज कर 47 मिनट तक। कलश स्थापना का सही समय सुबह 7.30 से 8.30 बजे तक है। 

पूर्वोत्तर कोने में पानी का छिड़काव कर फिर उस पर साफ मिट्टी या रेत की एक परत बिछाई जानी चाहिए। फिर उस पर मिट्टी या धातु का एक कलश स्थापित किया जाना चाहिए और वह कलश गले तक साफ, शुद्ध पानी से भरा होना चाहिए और उस कलश में एक सिक्का डालना चाहिए। यदि संभव हो तो कलश के जल में पवित्र नदियों का जल अवश्य डालना चाहिए। इसके बाद अपने दाहिने हाथ को कलश के मुख पर रखें और इस मंत्र का जाप करें।

"गंगेच यमुना! गोदावरी! सरस्वती

नर्मदे सिंधु! कावेरी! जले स संमिन सनिधिन कुरु"।

'साथ ही वरुण देवता को भी आह्वान करना चाहिए कि वह उस कलश में अपना स्थान ग्रहण करें। इसके कलश को ढक्कन या मिट्टी के कटोरे से ढंक दें। अब ऊपर के कटोरे में जौ या चावल भरें। इसके बाद, एक नारियल लें और इसे लाल कपड़े से लपेटें और उसके ऊपर इसे बाँध दें, इस प्रकार जौ या चावल से भरे कटोरे के ऊपर नारियल को रख दें और कलश की स्तापना करें।