पिछले कुछ हफ़्तों से पश्चिम बंगाल‌ में Narda Scam को लेकर काफी खलबली मची हुई है। कोर्ट ने पांच जजों बेच बनाई जिसके बाद टीएमसी के चारों नेताओं को अंतरिम जमानत दे दी है। इन चारों में मौजूदा पश्चिम बंगाल‌ के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, टीएमसी के विधायक मदन मित्रा और टीएमसी के पूर्व नेता शोवन चटर्जी के नाम शामिल है। कोर्ट ने दो लाख रुपए जुर्माना लेकर जमानत दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने चारों नेताओं के सामने कुछ शर्ते भी रखी है। नेताओं को Narda Scam के मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना होगा। किसी भी नेता को इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेन्स नहीं करनी है और ना ही किसी मीडिया के वक्ती से इस विषय पर बात करनी है। कोर्ट ने कहा है जो भी इन नियमों का उल्लघंन करेगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में असली मोड़ तब देखने को मिला जब सीबीआई ने 17 मई को चारों नेताओं के घर में छापा मारा था। इसके बाद चारों को सीबीआई अपने दफ्तर ले गई जहां उन्से कड़ी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और कोर्ट में पेश किया गया था। उसके कुछ दिनों बाद ही 21 मई को कोर्ट में सुनवाई के दौरान 2 जजों की सहमती ना हो पाने के कारण चारों नेताओं को कुछ शर्तो के साथ हाउस अरेस्ट का फैसला सुनाया गया और सुनवाई को आगे के लिए टाला गया था। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि अगली सुनवाई 5 सदस्यीय टीम पर होगी। इसमें जस्टिस बिंदल, जस्टिस बनर्जी, जस्टिस इंद्रप्रसन्न मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस सौमेन सेन शामिल हैं। आपको बता ‌दें, 28 मई की गई अंतिम सुनवाई के बाद तीन नेताओं को घर भेज दिया गया है। वहीं मदन मित्रा का स्वास्थ्य ठीक ना होने के कारण उनका अभी सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

क्या है Narda Scam ?

2014 में मैथ्यू सैमुअल नाम के एक पत्रकार जो दिल्ली के नारदा न्यूज पोर्टल में काम कर रहे थे उन्होंने दिल्ली से बंगाल जाने का विचार बनाया। बंगाल पहुंचने पर उन्होंने अपने आप को एक बिजनेस मैन बताया और वहीं रहने लगे। उस दौरान उन्होंने बंगाल के सात तृणमूल के सांसद,चार मंत्रिय, एक विधायक और एक पुलिस अधिकारी को घूस के रूप में पैसे देते देखा जिस पूरे दृश्य को पत्रकार ने एक टेम में कैद कर दिया। कुछ समय बाद 2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान उस टेप को नारदा न्यूज पोर्टल में डाल दिया गया। टेप के लोगों तक पहुंते ही टीएमसी के मंत्रीयो पर आरोप लगने शुरू हो गए वहीं विपक्षी पार्टीयों ने भी इसके खिलाफ जमकर आवाज़ उठाई थी। बाद में इस पूरे मामले की जांच के आदेश सीबीआई सौंप दिए गए।