पश्चिम बंगाल में चुनावी गहमागहमी और बीजेपी को कांटे की टक्कर देकर हराने के बाद, ममता 5 मई को राजधानी कोलकाता में लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। देशभर में कोरोना के कोहराम के कारण यह शपथ समारोह बहुत ही सादगीपूर्ण ढंग से किया जा रहा है।


पश्चिम बंगाल की तृणमूल काँग्रेस पार्टी ने बंगाल में भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की है। टीएमसी ने विधानसभा के 292 सीटों में से 213 सीटें अपने नाम की। जिसके साथ ही ममता ने बंगाल पर एक बार और फतह हासिल कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी 77 सीटों पर जीत हासिल कर बड़ी विपक्षी दल बनकर उभरी है। ऐसा दूसरी बार हुआ है जब टीएमसी विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत से जीती है। हालांकि वो अपनी ही सीट नंदीग्राम से लगभग 1900 वोटों से हार गई थी।


नंदीग्राम हॉटसीट पर चुनाव लड़ रही ममता के विपक्ष में उन्हीं की पार्टी के पूर्व विश्वस्त नेता शुभेंदु अधिकार थे। जिन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी का दामन छोड़ बीजेपी का हाथ थाम लिया। अपनी सीट हारने के बाद भी ममता ने दो तिहाई मतों से राज्य में जीत हासिल हुई है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया जा सकता है। लेकिन पद ग्रहण करने के 6 महीनों के अंदर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर ममता को अपना मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा।