उनकी बेटी मंदीप समारा ने यह जानकारी दी। उनके परिवार में उनकी पत्नी, बेटी एक बेटा हैं। उनकी बेटी ने कहा, "मेरे पिता रविवार को दिल का दौरा पड़ने के कारण दम तोड़ दिए।" उनका बेटा कनाडा में है और कोरोना महामारी के कारण पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।

जालंधर के संसारपुर में 2 जून 1932 को जन्मे बलबीर सिंह जूनियर ने छह साल की उम्र में हॉकी खेलना सीखा। उन्हें पहली बार 1951 में भारतीय टीम में चुना गया था।

वह 1962 में भारतीय सेना टीम में शामिल हुए और सेना टीम के लिए खेलना जारी रखे। वह 1984 में मेजर के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद चंडीगढ़ में बस गए। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक वीपी सिंह बदनोर ने उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है।

हॉकी इंडिया ने भी बलबीर सिंह जूनियर के निधन पर शोक जताया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोबम ने कहा, "हॉकी इंडिया की ओर से, मैं बलबीर सिंह जूनियर के परिवार को शोक ज्ञापन करता हूं। भारतीय हॉकी में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से हॉकी की दुनिया में दुख छाया हुआ है।