राजधानी दिल्ली में सोमवार को पारित किए गए जीएनसीटीडी  एक्ट को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से दिल्ली की जनता के फैसले पर उंगली उठाई गई है। दिल्ली में अब एलजी का मतलब है दिल्ली सरकार। ऐसा होने से दिल्ली में लोकतांत्रिक ढंग से चुन कर आई सरकार का कोई महत्व नहीं  रह जाता है, बल्कि जिन दलों को चुनाव में हार मिली थी अभी भी दिल्ली में उन्हीं का राज है।

दिल्ली की सत्ताधारी सरकार का केंद्र पर आरोप है कि केंद्र ने पिछले दरवाजे से आकर यहां की सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश की है। उनका यह भी कहना है कि  केवल पब्लिक ऑर्डर, पुलिस व जमीन को छोड़कर संविधान के अनुच्छेद  239 AA के मुताबिक चुनी गई सरकार को राज्य में सभी फैसले लेने का पूरा अधिकार है। नए कानून के तहत  दिल्ली सरकार को काम के लिए फाइल पहले उपराज्यपाल  को देनी होगी।

दिल्ली में एलजी का यह कोई नया मुद्दा नहीं है,  इसे लेकर पहले भी कई बार  विवाद उत्पन्न हो चुके हैं। सबसे पहले यह विवाद 1 अप्रैल 2015 को तब उभरकर सामने आया जब दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने अधिकारियों को यह आदेश दिए कि वह मुख्यमंत्री की बात न मानें व सारी फाइलें पहले उन्हें भेजें। सुप्रीम कोर्ट में चली बहस ने आखिरकार दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था।