पिछले 24 घंटों में कोरोना के 25 हज़ार से ज्यादा मामलों ने एक बार फिर चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। क्या देश एक बार फिर से बढ़ रहा है संपूर्ण लॉक डाउन की ओर?

बीते साल दिसंबर 2020 में जब कोरोना के केस में गिरावट आयी और इनका आंकड़ा 10 हज़ार के आसपास पहुंचा तब पूरी दुनिया में लोगों को ये लगने लगा कि भारत इस वायरस को हराकर विश्व गुरु बनने की तरफ बढ़ रहा है। उस वक्त देश की जनता भी इस महामारी के एहतियातन उपाय का पूरी तत्परता और अनुशासन से पालन कर रही थी, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों की लापरवाही ज़ोर  पकड़ने लगी और एक बार फिर से संक्रमीतों के बढ़ते हुए आंकड़े डराने लगे हैं। 

विशेषज्ञ  देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे की एक बड़ी वजह इसके एहतियात में बरती गई लापरवाही को मान रहे हैं। उनका कहना है कि फिजिकल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने जैसे उपायों का कड़ाई से पालन न करने के कारण लोगों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय के अनुसार पिछले दो दिनों में कोरोना संक्रमण के 48 हज़ार से भी ज्यादा नए मामले सामने आ चुके हैं। आपको बता दें कि पिछले साल 20 दिसम्बर को इस महामारी के 26 हज़ार से ज्यादा मामले आए थे, यह आंकड़ा दैनिक संक्रमितों का सबसे बड़ा आंकड़ा था। 

सीएसआइआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के निदेशक राकेश मिश्र कहते हैं, अगर इस तरह ही आंकड़े बढ़ते रहे तो भारत में ही इस वायरस की कोई नयी स्ट्रेन पैदा हो सकती है जिसके कारण लोगों को कोरोना संक्रमण की नयी लहर का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि विदेश से आए कोरोना के नए वैरिएंट की वजह से मामलों में तेजी आई है, बल्कि इसके पीछे लोगों की लापरवाही ज्यादा जिम्मेदार है।