RBI जो देश की मौद्रिक नीतिक को तय करता है उसने अपने रेपो-रेट और रिवर्स रेपो रेट में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए मौद्रिक नीति कमेटी की बैठक 6 अक्टूबर को शुरु हुई थी जो कि आज 8 अक्टूबर को खत्म हो गई है। 

पहले जैसा ही है रेपो-रेट और रिवर्स रेपो रेट

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक समाप्त होने के बाद कमिटि के द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी देश के सामने रख दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए उन्होंने बताया कि रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को 4% रखने के साथ-साथ रिज़र्व रेपो रेट को 3.5% ही बरकरार रखा है। ऐसो लगातार 8वी बार हुआ है जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में किसी भी तरह को कोई बदलाव नहीं किया है। और इसी के साथ रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में भी लचीलापन रखा है। 

बढ़ती महंगाई और त्योहारों को मौसम को देख लोगों में इस बात की उम्मीद थी कि रिज़र्व बैंक अपने रेपो रेट में बदलाव कर कुछ कम कर सकता है जिससे EMI का बोझ थोड़ा कम हो सके। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो उनका कहना था कि रेपो रेट पहले से ही सबसे निचली दर पर है और साथ ही बैंक भी सबसे निचली दर पर ही लोन दे रहे हैं। ऐसे में रिज़र्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता। रेपो रेट में बदलाव न होने से लोगों की उम्मीदों को काफी गहरा झटका लगा है। दरअसल रेपो-रेट वो ब्याज दर होता है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI बैंक से पैसा लेती हैं। 

लक्ष्य है महंगाई को दायरे में रखना

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि MPC ने 5-1 ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला लिया है। कोविड से उबर रही अर्थव्यवस्था को वृद्धि देना और महंगाई को एक सीमित दायरे तक रखना है। यह वो लक्ष्य हैं जिनके आधार पर इस फैसले को लिया गया है। 

रिज़र्व बैंक का अनुमान यह कहता है कि देश में महंगाई की दर 2021-22 में 5.1% रहेगी। यह पिछले अनुमान जो कि 5.7% था उससे कम है। इसी के साथ खुदरा मुद्रास्फीति चालु वित्त वर्ष 2021-22 में 5.3% ही रहेगा। 

जुलाई-सितंबर तिमाही की बात करें तो उसमें खुदरा महंगाई के 5.9% की जगह 5.1% रखने और अक्टूबर-दिसंबर में 5.3% की जगह 4.5% को करने की उम्मीद जताई जा रही है। तो वहीं जनवरी-मार्च में यह 5.8% पर रह सकती है। 

जीडीपी ग्रोथ 9.5% रहेगी

देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर भी रिज़र्व बैंक ने अपने अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक का मत तो यह कहता है कि ग्रोथ रेट 9.5% के दर पर ही स्तर रहेगी। तो वहीं MPC ने जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को संशोधिक किया और इसे 7.3% की जगह 7.9% कर दिया। अक्टूबर-दिसंबर के लिए इसे 6.3% की जगह 6.8% कर दिया। तो जनवरी-मार्च में इसे 6.1% की दर से बढ़ाने का अनुमान है। 

इसी के साथ ही रिज़र्व बैंक ने IMPC के माध्यम से होने वाली पेमेंट की लिमिट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दिया है।