राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले बेक़ाबू हो रहे हैं और संक्रमण के दार में लगातार बढ़त हो रही है जिससे मौत के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में शवों को दफनाने और जलाने के लिए कब्रिस्तान और श्मशान घाट में जगह नहीं बची है, मौतों का आंकड़ा इस कदर बढ़ रहा है कि शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए उनके परिजनों को कतारों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। 

इसी के सम्बंध में याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ अधिकारी पीठ से कब्रिस्तान और शमशान की संख्या बढ़ाने की मांग की है। साथ ही स्टेडियम, मैदान खुली जगह को अस्थायी रूप से दफन भूमि या श्मशान घाट में बदलने की भी मांग याचिकाकर्ता द्वारा की गई है। 

यही नहीं, शव के अंतिम संस्कार के लिए जगह ना मिला सिर्फ यही समस्या लोगों को नहीं सता रही। बल्कि जो मनमाना शुल्क अंतिम संस्कार करने के लिए मांग जा रहा है लोग उससे भी परेशान हैं। 

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुश्किल से कतार में लगने के बाद अंतिम संस्कार का मौका मिलता है और अगर हम यह मनमाना शुल्क जमा नहीं करते हैं तो हमे अंतिम संस्कार करने से रोक दिया जाता है और शव भी वापिस लौटा दिए जाते हैं। 

इसी कारण से अब हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार से इसका जवाब मांगा है।