गोवर्धन पर्व की जो कि दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है आज हम आपको गोवर्धन पर की कुछ ऐसी गिनी चुनी बातों से रूबरू कराएंगे जिन्हें आप जानकर अत्यधिक प्रसन्न हो जाएंगे जैसे आखिर गोवर्धन पर्वत है क्या?

हिंदू धर्म के अनुसार गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज बनाकर उनकी पूजा की जाती है बता दे गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है विशेषकर गाय को लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। 

 लक्ष्मी मां हमें स्वास्थ्य संबंधित धन देती है शास्त्रों में कहा गया है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज वासियों को   गोवर्धन महाराज की पूजा करने के लिए कहा था बस तभी से ही यह पूजा प्रचलित हो गई जो कि कलयुग तक चली आ रही है कहा जाता है कि गोवर्धन महाराज ने देवताओं के राजा इंद्र के प्रकोप से ब्रज वासियों की रक्षा की थी  जिसके चलते भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कन  की उंगली में उठाकर ब्रज वासियों को उस पर्वत के नीचे पन्हा दिलाई थी

 बस तभी से ही गोवर्धन महाराज की पूजा प्रचलित हो गई  यह तो रही बात गोवर्धन पर्व मनाने की हम आपको बताएंगे कि गोवर्धन महाराज की पूजा किस प्रकार करें जिससे  स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज आपसे प्रसन्न हो जाएं

 बता दें कि गोवर्धन पूजा को अनकूट  पूजा भी कहा जाता है इस दिन  गोवर्धन महाराज  का प्रसाद विभिन्न प्रकार की सामग्री से मिलकर बनता है जिसमें गेहूं चावल बेसन अनाज कड़ी  और पत्तेदार सब्जियां शामिल होती है गोवर्धन महाराज को प्रसन्न करने के लिए आप इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज की प्रतिमा बनाई इसके बाद गोवर्धन महाराज को रोली चावल खीर बताशे जल दूध पान केसर फूल आदि अर्पित करें और दीपक जलाकर भाग से उनकी पूजा करें जो प्रतिमा आपने बनाई है उसकी आप परिक्रमा करें इस दिन गाय को गुड़ में हरा चारा  खिलाने से भी भगवान खुश होते हैं। क्योंकि इस दिन गाय का विशेष महत्व है इसीलिए इस दिन  गाय की सेवा करना शुभ माना जाता है। इस दिन जो भी लोग श्रद्धा भक्ति से भगवान गोवर्धन की पूजा करते हैं उनकी सभी समस्याओं का निवारण हो जाता है साथ ही गोवर्धन महाराज का उनके ऊपर सदैव आशीर्वाद बना रहता है और उनकी बुद्धि और विवेक में भी वृद्धि होती है