ठंढ मे ठिठुरते हुए अपनी मांगों पर अड़े किसानों का हौसला बुलंद है| अपनी मांगों पर अड़े किसानों ने  शुक्रवार को 2021 मे प्रवेश करने का कोई जश्न नहीं मनाने का ऐलान किया है| किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें नहीं माँ लेती तब तक वह यहीं  रहेंगे और नए साल का जश्न नहीं मनाएंगे|

किसान पिछले 36 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे  हैं| इस बीच 30 दिसंबर को हुई सरकार से बातचीत में सरकार किसानों की दो मांगों पर सहमत हो गई है| हालाँकि किसानों का कहना है कि इन दोनों मांगों के पूरे होने से बहुत फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि दोनों ही अभी कानून की  शक्ल में नहीं हैं|यह दोनों मांगे पराली जलाने और बिजली बिल से संबंधित हैं| 

इसके अलावा गुरुवार को किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि एमएसपी की गारंटी और तीनों कृषि कानूनों की वापसी का कोई विकल्प नहीं है| वरिष्ठ किसान नेता गुरनाम सिंह चूढी का कहना है कि सरकार ने दो समस्याओं का समाधान कर दिया है लेकिन बाकी दो मांगों को मानने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है| उन्होंने बताया की शुक्रवार को किसान संगठन फिर से एक सभा करके आगे की रूपरेखा तैयार करेंगे| 

गौरतलब है कि किसान पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं|