90 के दशक की सबसे मशहूर जोड़ी नदीम-श्रवण की प्रसिद्धि श्रवण राठौर का आज मुंबई में निधन हो गया।  यहां एसएल रहेजा अस्पताल में उनका कोरोना का इलाज चल रहा था।

नदीम के साथ मिलकर उन्होंने 90 के दशक में कई फिल्मों में बेहतरीन संगीत दिया।  लेकिन 1997 में गुलशन कुमार की हत्या के मामले में नाम आने के बाद नदीम लंदन भाग गए।  जिसके बाद इस जोड़ी में दूरियां बन गईं।  इसका खामियाजा श्रवण को भी उठाना पड़ा।  जिसके बाद उनका करिअर दोबारा उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सका।

कोरोना का, श्रवण का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा था कि वह कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंता थी सबको।

बीमारी की इन बहुत गंभीर स्थितियों के कारण, उनके कोरोना के उपचार में भी समस्या हो रही थी ।  आज दिन में उनकी तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका।  श्रवण का जन्म 13 नवंबर 1954 को हुआ था।

नदीम-श्रवण की जोड़ी का संगीत 1990 के दशक में बॉलीवुड मे काफी चर्चे में था।  नदीम सैफी ने अपने साथी श्रवण राठौर के साथ कई शानदार फिल्मों में संगीत दिया है।  फिल्म आशिकी में उनके रोमांटिक गानों की धुन बेहद लोकप्रिय हुई।  

 बता दें, नदीम-श्रवण की जोड़ी 'आशिकी', 'साजन', 'सदक', 'दिल है कि मानता नहीं', 'साथी', 'दीवाना', 'फूल और कांटे', 'राजा हिंदुस्तानी', 'जन तेरे नाम'  'रंग', 'राजा', 'धड़क', 'परदेस', 'दिलवाले', 'राज' जैसी फिल्मों में संगीत देकर प्रशंसकों को दीवाना बना दिया था।  इस जोड़ी के गाने आज तक पसंद किए जाते हैं।