मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला पलवल से सामने आया है। पलवल जिला में रहने वाली अन्ना देवी गर्भवती थी और उनका उपचार नलहड़ अस्पताल में चल रहा था। 

बता दें कि अन्ना देवी अपने गर्भावस्था के कारण कमज़ोर थी और उनका इलाज वहीं के स्थानीय सरकारी अस्पताल में होना था। लेकिन प्रशासन की बदहाल व्यवस्था के कारण वहाँ के डॉक्टर ने उन्हें आपातकाल की स्थिती में नलहड़ अस्पताल में भर्ती कराया। 

डॉक्टरों ने उनका कोविड टेस्ट किया और नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ज़रुरी सुविधाएं मुहैया कराई। भर्ती होने के अगले दिन अन्ना देवी ने एक बिटिया को जन्म दिया और जन्म के 8 दिन बाद उनका निधन हो गया। जब इसकी सूचना उनके पति हेमराज को दी तो पहले वह बिलक बिलक कर रोये और बाद में उसने यह सूचना परिवार वालो को दी। 

परन्तु संक्रमण के भय के कारण हेमराज के परिवार वालों ने उसे हाथ लगाना तो दूर देखना भी नहीं चाहा और साथ ही यह भी कहा कि वह अन्ना देवी को घर नहीं लेकर जा सकते। जबकि उसकी कोविड टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। हेमराज की उसके परिवार वालों ने एक न सुनी और अन्ना देवी का शरीर वहीं पड़ा रह गया। 

गौरतलब है कि यह कोई पहला या नया मामला नहीं है। जहाँ संक्रमण के डर से कोई परिवार अपने सदस्य को इस तरह छोड़कर गया हो। ऐसे कई संवेदनशील मामले हैं जो हर राज्य से सामने आ रहे हैं और हमें शर्मसार कर रहे हैं। 

क्या यही है एक दूसरे के लिए हमारे हृदयों में करुणा, प्रेम, सद्भावना? 
इस महामारी का हमें एक दूसरे के साथ मिलकर, एकजुटता से सामना करना होगा तभी हम इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।