पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनाव में दिन प्रतिदिन कुछ न कुछ नया देखने को मिल रहा है। 15 अप्रैल के दिन चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष को 24 घंटो के लिए बैन कर दिया है। इस बीच दिलीप घोष को 15 अप्रैल शाम 7 बजे से लेकर अगले दिन 16 अप्रैल शाम 7 बजे तक किसी तरह के चुनावी प्रचार करने की अनुमति नहीं है। घोष पर यह रोक परगना के बारंगर में रैली के दौरान दिए विवादित बयान को लेकर लगाया गया है। चुनाव आयोग ने इस बयान को लेकर 13 अप्रैल को घोष को एक नोटिस भेजा था जिसमे घोष के दिए बयान को आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था।

गौरतलब है कि घोष ने यह बयान सीतलकुची में हुई केंद्रीय बलों द्वारा गोलीबारी की घटना को लेकर दिया था उन्होंने कहा था कि ये तो शुरुआत है। अगर आगे भी किसी ने कानून व्यवस्था को बस में लेने की कोशिश की तो उसके साथ यही होगा। चुनाव आयोग ने घोष के इस बयान को विवादित बताते हुए आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। हालांकि बाद में घोष ने अपने बयान को लेकर पछतावा जताया और कहा की वो भविष्य में ऐसे बयानों को लेकर सावधान रहेंगे।

इससे पहले भी चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनावों के दौरान राज्य की सत्ताधारी ममता बनर्जी को भी 24 घंटो के लिए बैन किया था। जिसे ममता बनर्जी ने अलोकतांत्रिक ठहराया था। दिलीप घोष के बाद बीजेपी के एक और नेता शायंतन बसु को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है और 24 घंटे में उनसे जवाब मांगा है। बसु को यह नोटिस उनके द्वारा दिए एक भाषण को लेकर भेजा गया है जिसमे उन पर जनता को डराने धमकाने का आरोप है।