महेंद्र सिंह धोनी, शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जो इस नाम से अपरिचित हो। आज धोनी को क्रिकेट के हर फॉर्मेट से रिटायर हुए तकरीबन सात महीने से अधिक हो गए हैं। उन्हों ने अपना आखिरी मैच 2019 का वर्ल्ड कप सेमीफाइनल, न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। जहाँ न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। 

जब तक धोनी मैदान पर रहते उनका जादू सब पर छाया रहता था। रिटायरमेंट के इतने दिन बाद भी लोग उन्हें और उनकी क्रिकेट को भूल नहीं पाए हैं। चाहे बात विकेट के पीछे से बॉलर को सही रास्ता दिखाने कि हो या कप्तान को DRS लेने में मदद करने कि हो। इसलिए DRS को Dhoni Review System भी कहा जाता था ….


आपको बता दें की जब तक धोनी ने क्रिकेट खेला और विकेटकीपिंग की वो स्पिनरों के लिए वरदान साबित हुई। विकेट के पीछे तेज हाथों से स्टंपिंग करना या बॉलरों को मार पड़ने पर उन्हें सही सुझाव देना जो की बॉलरों के लिए रामबाण जैसा काम करता था। 

हाल ही में खेले गए इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में जहाँ हमारे स्पिनरों की जमकर धुलाई हुई, वहीं इंग्लैंड के स्पिनरों ने हम पर लगाम लगा कर रखा।


आपको एक रोचक आंकड़ा बताता हूँ। जब तक कुलदीप ने धोनी के मौजूदगी में गेंदबाजी की उन्होंने 47 मैचों में 91 विकेट लिए, 5 से भी कम रन रेट के साथ। वहीं जब धोनी के बिना बॉलिंग की तो 16 मैचों में सिर्फ 14 विकेट ही ले पाए, वो भी 6 से अधिक रन रेट के साथ। कुछ ऐसा ही हाल अपने यूज़वेंद्र चहल का भी रहा। ऐसे में ये कहना ग़लत नहीं होगा कि धोनी की मौजूदगी स्पिनरों के लिए हमेशा वरदान जैसी रही। शायद यही उनकी विकेट के पीछे से क्रिकेट की समझ उन्हें एक महान क्रिकेटर बनाती है।