दिल्ली के अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर की लगातार कमी के कारण हज़ारों मरीज़ों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को लेकर एक बार फ़िर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार आमने सामने है। 

दिल्ली सरकार ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऑक्सीजन की कमी केंद्र सरकार की वजह से हुई है और हाइकोर्ट के सामने दिल्ली सरकार ने केंद्र को इसका ज़िम्मेदार ठहराया है। वहीं केंद्र सरकार ने जवाब में दिल्ली सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि आज दिल्ली की स्थिति के लिए और ऑक्सीजन की कमी के लिए दिल्ली सरकार ज़िम्मेदारी है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष लेते हुए कहा कि ऑक्सीजन की कमी सिर्फ दिल्ली सरकार यानी राज्य सरकार की वजह से हुई है। दिल्ली सरकार ना तो ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर पा रही है और ना ही टैंकरों का प्रबंधन ठीक से किया है।

जब तुषार मेहता ने दिल्ली सरकार को हाइकोर्ट के सामने प्रश्नों के जाल में घेर लिया तब दिल्ली सरकार का उसपर बयान आया और राज्य सरकार ने कहा, राष्ट्रीय राजधानी को 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की तुलना में 309 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली जो ऑक्सीजन संकट का मूल कारण है। 

प्रश्न अब ये उठता है कि आरोप प्रत्यारोप तो चलता रहेगा लेकिन इसके बीच ऑक्सीजन न मिलने से हुई मौतों का ज़िम्मेदार कौन होगा? केंद्र और राज्य की इस तकरार में ना जाने कितने लोग अपनी जान गवां चुके हैं और कुछ तो अभी भी अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। 

आखिर कब थमेगा यह सिलसिला? कब तक केंद्र और राज्य एक दूसरे पर तंज कसना छोड़ कर देशवासियों के हित और जीवन  के बारे में सोचेंगे।