दिल्ली में 6 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन ने साल भर पहले की तस्वीरों को एक बार फिर से दोहराया। लॉकडाउन के ऐलान के बाद से ही सड़कों पर साल भर पहले का मंजर दोबारा देखने को मिला। भारी मात्रा में सड़कों पर दिल्ली से पलायन करने वाले लोगों का जनसैलाब उतरा। दरअसल 19 अप्रैल के दिन एक डिजिटल प्रेस वार्ता कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना के कहर को देखते हुए राज्य में 6 दिनों का मिनी लॉकडाउन का ऐलान किया। जिसके बाद से लोगों ने अपना बोरिया बिस्तर बांधा और दिल्ली के बस अड्डों और रेलवे स्टेशन पर अपने अपने परिवारों के साथ घर वापसी के लिए पहुंचे। 


लॉकडाउन के ऐलान के साथ ही लोगों में जीविका का डर साफ देखने को मिल रहा है। 19 अप्रैल के दिन तालाबंदी के खबर भर से ही दिल्ली की सड़कों पर दिन भर जाम रहा। कहीं कोई बाजारों की तरफ जरूरी चीजों के इंतजाम में जा रहा तो कोई निजी और सार्वजनिक वाहनों का सहारा ले जैसे तैसे अपने शहरों और राज्यों की तरफ पलायन में लगा हुआ है। दिल्ली के आनंद विहार और कौशांबी बस अड्डों पर मजदूरों का हुजूम उमड़ पड़ा, यही नहीं दिल्ली में बाकी बस अड्डों का भी कुछ यही हाल था। लोगों को कोरोना से ज्यादा रोजगार की चिंता सता रही है क्योंकि गरीब कोरोना से पहले बेरोजगारी से बेहाल हो जायेगा। पलायन करने वालों में भारी संख्या में बिहार, यूपी और अलग अलग राज्यों से रोजगार के लिए आए मजदूर शामिल है। 


यह लॉकडाउन दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को महामारी के प्रति तैयार करने के लिए लगाया गया है। सवाल यह भी है कि पहली बार राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। कोरोना से लगभग साल भर से भी अधिक समय से लोग जूझ रहे हैं, ऐसे में इसके लिए पहले से तैयार न होना सरकार की लापरवाही को साफ दर्शाता है। दिल्ली के अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की भारी मात्रा में कमी देखी जा रही है और नए संक्रमितो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 19 अप्रैल से पहले 3 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने दिल्ली के लोगों को लॉकडाउन की स्थिति की नौबत नहीं आएगी का भरोसा दिलाया फिर 13 अप्रैल को दिल्ली में वीकेंड लॉकडाउन का ऐलान किया और आखिर में संपूर्ण लॉकडाउन का फरमान थमा दिया। मुख्यमंत्री कहते हैं उन्हें पता है कि लॉकडाउन से कोरोना नहीं थमेगा लेकिन कमी जरूर आएगी। दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को कॉलेप्स होने से बचाने के लिए यह जरूरी है। दिल्ली का हाल पहले से ही कोरोना से बेहाल था तो वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों का पलायन दिल्ली के लिए और भी दयनीय स्थिति उत्पन्न कर रहा है।