राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। यहाँ केवल कोरोना ही नहीं बल्कि कोरोना के कारण हो रही अन्य समस्याएं लोगों का जीवन संकट में डाल रही हैं। अस्पतालों में मरीजों को कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, कहीं लोगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है, तो कहीं अस्पतालों में मरीजों के लिए बड़ों की कमी देखने को मिल रही है। दिल्ली को इस मुश्किल घड़ी से निकालने के लिए दिल्ली सरकार को जहां से भी मदद मिल रही है, उस से मदद लेने का प्रयास करती नजर आ रही है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई बार प्रधानमंत्री से दिल्ली में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने की मांग की और कहा गया दिल्ली को हर दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की ज़रूरत है, इसे कृपया करके पूरा किया जाए। इन्हीं सब के बीच 3 मई बुधवार को दिल्ली को पहली बार 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई की गई जो अभी तक सबसे ज्यादा मानी गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद करते हुए पत्र लिखा।

केजरीवाल ने पत्र में लिखा, दिल्ली में कई दिनों से ऑक्सीजन की भारी कमी चल रही थी। यहाँ ऑक्सीजन की रोजाना की खपत 700 मीट्रिक टन है और हम लगातार केद्र सरकार से इसकी मांग कर रहे थे। 3 मई को पहली बार दिल्ली को 730 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली है। जिसके लिए मैं दिल्ली के लोगों की तरफ से आपका दिल से धन्यवाद करता हूँ। आपसे बिनती है दिल्ली को इतनी ऑक्सीजन रोजाना दिलवाई जाए, इसे कम ना किया जाए। पूरी दिल्ली आपकी आभारी होगी।


आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया, आज दिल्ली के 50 से ज्यादा अस्पतालों में सर्वे किया गया है। जिसमें पता चला है कि सभी हॉस्पिटल्स में ऑक्सीजन की मात्रा पूरी है और आगे कोई समस्या देखने को नहीं मिलेगी। वहीं जब कोर्ट ने कहा कि आपको दिल्ली में 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रोजाना देनी होगी तो इस पर केंद्र ने कहा कि अगर हम इतनी ऑक्सीजन अकेले दिल्ली को दे देंगे तो बाकी राज्य को कहाँ से देंगे। केंद्र ने तो इस पर अपनी बात रख दी कि उनके पास दिल्ली के लिए 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाएगा। लेकिन अब उन मरीजों का क्या जो ICU में भर्ती है??? क्या एक दिन ऑक्सीजन भेज देने से सभी मरीजों की जान बच जाएगी??? क्या विदेशों से आने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर अभी भी हमारे देश के लिए पूरे नहीं हो पा रहे हैं??? या फिर सरकार उनका सही तरह से उपयोग नहीं कर पा रही है???