कोरोना के कारण जहां संक्रमित लोगों का ग्राफ लगातार बढ़ता नजर आ रहा है वहीं मरने वालों की तादाद भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। दिल्ली में इस बार कोरोना का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है, यहां एक दिन में 300 से ऊपर लोगों की मौतें दर्ज की जा रही है। अब इतने सारे लोगों के मरने से दिल्ली के श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार दिक्कतें सुनने में आ रही है।

                       वहीं दिल्ली के सराये काले खां शमशान घाट में भी शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह की कमी हो रही है। यहां एक दिन में 60-70 शव जलाए जा रहे हैं जबकी क्षमता केवल 22 शवों को जलाने की ही है। जगह ना होने के कारण शवों को जलाने के लिए अब पार्क का इस्तेमाल किया जा रहा है साथ ही 100 नए प्लेटफार्म बनाने का आदेश दिया गया ।

                  ऐसी स्थिति ना केवल दिल्ली में बल्कि पूरे भारत में देखने को मिल रही है। कई शमशान घाटों में रात तक अंतिम संस्कार किया जा रहा है, तो कहीं एक साथ दो शव जलाए जा रहे हैं। देश की ऐसी हालत के पीछे आखिर किसकी गलती है। क्या कोरोना ही एक मात्र वजह है या‌ इसमें प्रशासन की लापरवाही ज्यादा देखने को मिल रही है?