वैसे तो सभी जानते हैं कि महज़ कुछ ही दिन पहले लगभग चुनाव से पहले पार्टी की जाने-माने अध्यक्ष अदिति सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने में खुद को असमर्थ पा रही थी और उन्होंने बीजेपी से गठबंधन कर लिया। आज फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा क्योंकि पार्टी के जाने-माने और वरिष्ठ नेता विक्रमादित्य सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया है। यह भी पढ़ें- कौन होगा गोवा का अगला CM और किसकी होगी जीत Trending Politics News

कहा क कांग्रेस पार्टीलोगों की भावनाओं को नहीं समझती है और उनके अंडर में काम कर रहे लोगों पर दबाव बनाए रहती है। अपना विचार कोई व्यक्त नहीं कर सकता है कांग्रेस पार्टी लोगों की भावनाओं को नहीं समझती है वह लद्दाख में रह रहे लोगों की भावनाओं को नहीं समझ पाती है। और ऐसे में मेरा कांग्रेस से जुड़े रहना संभव नहीं हो पा रहा था। इसलिए मैंने अपने इस्तीफा का नोटिस कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा की जब 2018 में पार्टी ज्वाइन किए थे तो उनके विचार कांग्रेस पार्टी से नहीं मिलते थे और आज भी वही स्थिति है।

Vikramaditya Singh कई मुद्दों या कई घटनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए लेकिन कांग्रेस का विचार सिंह के विचार से मेल नहीं हो पाया। (Trending politics) इनमें बालाकोट, हवाई हमले, जम्मू कश्मीर में ग्राम रक्षा समिति यूवीडीसी का पुनः सशक्तिकरण, अनुच्छेद 370, और 35A का निरीक्षण, लद्दाख का केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठन, गुपकर गठबंधन की निंदा, और जम्मू कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया मसौदे के लिए समर्थन, आदि भी शामिल है। कहा कि जहां व्यक्ति अपने विचारधारा को स्वतंत्रता से व्यक्त नहीं कर सकता वहां जुड़े रहना कठिन हो जाता है। मैं अपने प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे रहा हूं। यह भी पढ़ें-लंबे इंतजार के बाद रिलीज होने को तैयार फिल्म ब्रह्मास्त्र

जब पार्टी में हमें कोई जिम्मेवारी दी जाती है तो उसको निभाने के लिए हमारे पास स्वतंत्रता भी होनी चाहिए। (Hindi News) ना कि किसी के दबाव में आकर हम वह काम करें जो नहीं करना चाहिए क्योंकि एक पार्टी के बनने से और उसमें कार्यवाहक मंत्रियों से हमारा देश सशक्त और दृढ़ निश्चय ही होता है। आपको बता दें कि विक्रमादित्य सिंह जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के पोते और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व राज्यपाल और राष्ट्रीय राजनेता डॉक्टर करण सिंह के बेटे हैं। इन्होंने कांग्रेस में रहकर 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था जिन्हें 2015 में जम्मू कश्मीर विधान परिषद का सदस्य भी नामित किया गया था।

आगे कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों के लिए और लद्दाख में रहने वाले लोगों के लिए हमेशा संवेदनशील भावना ही रखते हैं आगे भी रखना चाहते हैं जो कि कांग्रेस में रहकर संभव नहीं था। आपको बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी जो कि जाने-माने मंत्री थे उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ने से पहले इसी बात पर चर्चा की थी कि पार्टी में स्वतंत्रता नाम की कोई चीज नहीं है। और ऐसी जगह पर काम करना भी बहुत बड़ा पाप होता है। जहां लोगों की भावनाओं का हमेशा अवहेलना की जाए।

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