पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना के नए मामलों में थोड़ी सी गिरावट देखने को मिली है इसी बीच राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के मुद्दे को केंद्र सरकार ने अनसुना कर दिया है। सरकारी सूत्रों की मानें तो फिलहाल देश के अधिकतर जिलों में कोरोना नियंत्रण में है। जिन राज्यों में संक्रमण ज्यादा है वहां सीमित या पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया है जिसका असर दिखने लगा है। ऐसे में केंद्र का मानना है कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन न सिर्फ गलत होगा बल्कि गरीबों के लिए और भी परेशानी लाएगा। 


पिछले दिनों में सुप्रीम कोर्ट और औद्योगिक संगठनों के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से देश में संपूर्ण लॉकडाउन की मांग की जा रही है। हालांकि सरकारी सूत्र इसे तार्किक नहीं मानते हैं। उनके अनुसार पिछली बार जब देश में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई थी तो कई लोगों ने इस का मजाक उड़ाया था जबकि उस वक्त इसकी जरूरत इसलिए थी क्योंकि कोरोना वायरस से लोग अनजान थे। इसके इलाज को लेकर असमंजस की स्थिति थी। अभी फिलहाल देश में ऑक्सीजन या आईसीयू बेड की आपूर्ति को लेकर समस्या है जिसका समाधान किया जा रहा है। 


ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में फिलहाल सत्र ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना के एक्टिव केस 50000 से कम है। पांच राज्य ऐसे हैं जहां सक्रिय मामले 5 फीसदी से भी कम हैं। अगर जिलों की बात की जाए तो देश में आधे से ज्यादा जिलों में स्थिति काबू में है। 

Lockdown का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा गया-

केंद्र सरकार का कहना है कि लॉकडाउन का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ा गया है। कई राज्यों की सरकार ने इस पर अमल भी किया है। महाराष्ट्र में पहले ही पाबंदियां लगाई जा चुकी है तो वही बिहार में भी 15 मई तक संपूर्ण लोग नाम का ऐलान किया है। इसके अलावा राजस्थान, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, उड़ीसा, झारखंड समेत कई राज्यों में भी उस तरह की सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं।