कोरोना की दूसरी लहर पूरी दुनिया में तेज़ी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। इस रफ़्तार को कम करने के लिए वैक्सीनेशन में भी तेज़ी लाई जा रही है। जहाँ एक तरफ वैक्सीन कोरोना से जंग में लोगों के लिए कवच का काम कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ ग्लासगो की एक महिला के लिए यही वैक्सीन मुसीबत बन गई है। महिला ने दावा किया है, एक्स्ट्रोजेनेका वैक्सीन की डोज लेने के बाद उसके पैर में खुन से भरे फफोले हो गए हैं। जो कि बेहद ही तकलीफ देह हैं।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लासगो की रहने वाली एक महिला सारा बूकमैन ने मार्च के मध्य में एस्ट्रोजेनेका कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ली थी, जिसके बाद फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दिए। यह एक बहुत ही सामान्य साइड इफेक्ट था, इसलिए सारा ने पहले इसे नज़र-अंदाज किया। लेकिन एक हफ्ते बाद उन्हें पैरों में झुनझुनी और सनसनी सा महसूस होने लगा और फिर टखनों के चारों ओर लाल चकत्ते से बन गए। यह देखने के बाद महिला ने स्वास्थ्य देखरेख करने वाले शख्स को बुलाया। लेकिन दोपहर तक उसकी त्वचा पर खून के फफोले निकल आए, जिसके बाद महिला को तुरंत क्वीन एलिजाबेथ यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। महिला की स्थिति काफ़ी दर्दनाक हो गई थी। 

बुकमैन इस बात से काफ़ी डरी हुई हैं कि कहीं डॉक्टरों को उनका पैर ना काटना पड़े। हालांकि डॉक्टरों ने अभी ऐसा कुछ कहा नहीं है। सारा ने अस्पताल में 16 दिन बिताए जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी है। लेकिन अभी भी वह व्हीलचेयर के सहारे ही अपना जीवन काट रही हैं क्योंकि उनके पैरों पर पट्टियां लगी हुई हैं और तलवों पर फफोले के कारण वह चलने में असमर्थ हैं। अभी भी सारा के हाथ, चेहरे और पैर पर छाले दिखाई पड़ रहे हैं। 

ब्रिटेन के त्वचा विशेषज्ञों ने बताया कि महिला को वैक्सीन के अत्यंत दुर्लभ प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है। सारा बूकमैन ने वैक्सीन लेने के लिए ब्रिटेन के लोगों से आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने के लिए उन्हें अपनी आपबीती सबको बतानी चाहिए। वहीं डॉक्टरों ने महिला को फिलहाल के लिए वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने से मना किया है।