कोरोना महामारी के भयावह संकट के बीच पटना हाई कोर्ट राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सरकार के एक्शन प्लान को लेकर लगातार सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट ने बीते दिनों 3 सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई, जिसमें डॉ रवि कृति, डॉ उमेश भदानी और डॉक्टर रविशंकर सिंह शामिल हैं। इस कमेटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी। 

रिपोर्ट के मुताबिक जहाँ पूरे देश में मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं, वहीं IGIMS, PMCH और मेदांता अस्पताल में बेड्स खाली पड़े हैं। मेदांता अस्पताल तो अब तक शुरू भी नहीं हो पाया है। वहीं ऑक्सीजन सप्लाई सही ढंग से ना होने के कारण अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रही है।

इस रिपोर्ट को देखने के बाद जस्टिस सीएमसी की खंडपीठ ने बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से निर्धारित 194 मैट्रिक टर्न ऑक्सीजन में से राज्य सरकार केवल 90 मेट्रिक टर्न ऑक्सीजन उठवा पा रहा है। फिर सरकार यह दावा कैसे कर सकता है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है। पटना हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि अगर राज्य में ऑक्सीजन है तो फिर मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से कैसे हो रही है? साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार की ओर से तय 194 मैट्रिक टर्न ऑक्सीजन का उठाव वे सुनिश्चित करें।

इन सबके अलावा सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि बिहार के अस्पतालों में तकरीबन 46 हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली हैं। जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि इतने साल से सरकार क्या कर रही थी?