कोरोना की दूसरी लहर जिस तरह से जाल बिछाते नज़र आ रही है इसी बीच मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना के पीछे केवल चुनाव आयोगों को दोषी ठहराया है। सोमवार को कोर्ट की फटकार के बाद मंगलवार को चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के नियमों में कई पाबंदियां लगाते हुए कुछ गाइडलाइंस जारी की है । चुनाव आयोग ने 2 मई को आने वाले नतीजों के बाद जीत के जश्न पर रोक लगा दी है साथ ही जीत का सर्टिफिकेट लाने के लिए उम्मीवारों के साथ केवल दो लोगों को जाने की अनुमति दी है।

           कोर्ट ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी है, अगर चुनाव प्रचार में किसी भी तरह के कोरोना प्रोटोकॉल्स का उल्लघंन हुआ तो कोर्ट को 2 मई को आने वाले परिणामों पर रोक लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बता दें, काउंटिंग वाले दिन 7 राज्यों के परिणाम आने वाले हैं जिनमें तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, असम, पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इनमें से पश्चिम बंगाल के 7 चरणों के चुनाव हो गए हैं और 29 को आखिरी होगा।

           इससे पहले भी चुनाव आयोग ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए गुरुवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव रैलीयों, रोड़ शो और बाइक रैलियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी और जनसभाओं में केवल 500 लोगों को ही भाग लेने की अनुमति दी थी। हाई कोर्ट ने चुनाव की कई लापरवाही पर चिंता भी जताई कहा अगर नागरिक ही नहीं बचेंगे तो उन अधिकारों का क्या करेंगे जो हमें जीत हासिल करने पर मिलेंगे। आज के समय में लोगों को ज़िंदा बचाना ज्यादा जरूरी है बाकी काम बाद में। क्या चुनाव को लेकर चुनाव आयोग को और कड़ी पाबंदियां लगानी चाहिए? या इस बार के चुनावों को टाल देना चाहिए?