रविवार शाम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंघु बॉर्डर पहुंचे| वह बॉर्डर पर किसानों के द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में शामिल हुए| उनके साथ दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी पहुंचे| केजरीवाल ने किसानों से मिलने के बाद कहा कि मैं केंद्र सरकार के साथ ओपन डिबेट करने के लिए तैयार हूं | इससे यह साफ हो जाएगा कि यह कृषि कानून किसानों को किस तरह नुकसान पहुंचाएगा| साथ ही उन्होंने कहा कि  यह कानून बड़े-बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाएगा, हमारे किसान भाइयों को नहीं| इस समय पूरा देश दो पक्षों में बटा हुआ है, एक पक्ष जो किसानों को नुकसान कर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहता है और दूसरा पक्ष जो पूंजीपतियों की चिंता किए बिना किसानों के साथ खड़ा है|

"मन की बात" का किसानों ने किया विरोध -

इस बीच रविवार को  किसानों ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम का विरोध थाली बजाकर किया| भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जैसे पीएम मोदी ने कहा था कि कोरोना थाली बजाने से भाग जाएगा, उसी प्रकार किसान भी थाली बजा रहें हैं ताकि कृषि कानूनों को भगाया जाए|

बातचीत के लिए तैयार हैं किसान -

संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला किया कि सरकार से एक बार सरकार से फिर बातचीत शुरू की जाए| उसके लिए किसानों ने 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे का समय सरकार को दिया है, साथ ही अपनी 4 शर्तें भी रखी हैं|

ये शर्तें इस प्रकार हैं-

1.सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के संभावित विकल्पों पर बातचीत करे|
2. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी ज़मानत  बातचीत के एजेंडे में रहे|
3. सजा के प्रोविजन "कमीशन फॉर द एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ऑर्डिनेंस" के तहत  किसानों पर लागू नही होने चाहिए| ऑर्डिनेंस में संशोधन कर नोटिफाई किया जाए।
4. बातचीत के एजेंडे में "इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल" में बदलाव का मुद्दा भी  शामिल होना चाहिए|

गौरतलब है कि किसान पिछले एक माह से भी ज्यादा समय से इस कानून का विरोध कर रहे हैं| ऐसे में अरविन्द केजरीवाल ने सिंघु बॉर्डर पहुंचकर किसानों को अपना समर्थन दिया है|