मार्च 1992 में सिस्टर अभया की हत्या के मामले का फैसला आ गया है| केरल की विशेष सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में दोषी पादरी और नन को उम्रकैद की सजा सुनाई है| मंगलवार को कोर्ट ने इस मामले में फादर थॉमस कोट्टूर और नन सिस्टर सेफी को हत्या का दोषी ठहराया था| 28 साल पहले मार्च 1992 में केरल एक कॉन्वेंट स्कूल में सिस्टर अभया का उसी चर्च के फादर थॉमस कोट्टूर और नन सिस्टर सेफी ने बेरहमी से क़त्ल कर दिया था| 

इस मामले में मुख्य अपराधी फादर कोट्टूर को आईपीसी की धारा 302 के तहत पांच लाख रुपये का जुर्माना और उम्रकैद की सजा सुनाई गई है| दूसरी ओर सबूत मिटाने के लिए 7 साल की सजा के साथ ही कान्वेंट अस्कूल में गैर- अधिकृत तरीके से घुसने पर भी उम्रकैद की सजा दी गई है | मामले की दूसरी आरोपी सिस्टर सोफी को भी इन्ही धाराओं में समान सजा मिली है| सिस्टर सोफी उसी विभाग की इंचार्ज थी जहाँ सिस्टर अभया रहती थी| 

पूरा मामला कोट्टायम के एक कॉन्वेंट स्कूल का है| मार्च 1992 में सिस्टर अभया ने थॉमस कोट्टूर, एक अन्य पादरी होज़े फूथराकयाल और सेफी के बीच अनैतिक गतिविधियों को देख लिया| इसके बाद दोनों ने मिलकर अभया की हत्या कर दी| सीबीआई के अनुसार अपना अपराध छिपाने के लिए इन लोगों ने सिस्टर अभय की पहले हत्या की उसके बाद उसी कान्वेंट के एक कुँए में उसका शव फेंक दिया | मामले को पहले आत्महत्या की नज़र से देखा लेकिन बाद में कई बातें साफ़ नहीं हो पा रही थी और भारी विरोध और दबाव के बीच यह मामला सीबीआई को देना पड़ा था| इस पूरे मामले में सीबीआई ने भी अपनी 3 फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दीं जिन्हें कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया| इस मामले में दूसरे पादरी फूथराकयाल को पिछले साल बरी कर दिया गया था.