किसान आंदोलन का शुक्रवार को 51वां दिन था। साथ ही 10वें दौर की बातचीत भी किसान और सरकार के बीच विज्ञान भवन में हुई। इस बार भी बैठक करीब 4 घंटे चली पर कोई परिणाम नहीं निकला। इस बार बैठक में  3 मंत्री- कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश मौजूद थे। अब अगली बैठक 19 जनवरी को होंगी।

9 बैठकों में अब तक क्या हुआ?


पहले दौर की बैठक 14 अक्टूबर को हुई।

पहली बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह किसानों से बात करने के लिए कृषि सचिव आए थे। किसान संगठनों ने उस बैठक का बायकॉट किया क्योंकि वह कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे। जो पहली बैठक के दौरान नहीं हुई।

दूसरे दौर की बैठक 13 नवंबर को हुई।

दूसरे बैठक के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ बातचीत की जो करीब 7 घंटे तक चली, उसके बावजूद कोई नतीजा नहीं निकल सका।

तीसरे दौर की बैठक 1 दिसंबर को हुई।

तीन घंटे बातचीत हुई। सरकार ने किसानों को एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन अपनी मांग पर ही अड़े रहे, उन्होंने कहा सरकार तीनों कानूनको  रद्द करे।

चौथे दौर की बैठक 3 दिसंबर को हुई।

चौथे दौर की बैठक भी करीब साढ़े 7 घंटे तक चली। जिसमें सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। इस पर किसानों का कहना था कि सरकार MSP पर गारंटी देऔर साथी ही तीनों कृषि कानून को भी रद्द करे।

पाँचवें दौर की बैठक 5 दिसंबर को हुई।

सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को मान गई, लेकिन किसानों ने कहा कि सरकार  हमें कानून रद्द करने पर हां या न में जवाब दे।

छठे दौर की बैठक 8 दिसंबर को हुई।

भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। उसके अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया किसानों के समक्ष रखा, लेकिन किसान संगठनों ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

सातवें दौर की बैठक 30 दिसंबर को हुई।

नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक में बातचीत की। जिसमे दो मुद्दों पर रजामंदी बनी, पर दो मुद्दों पर मतभेद कायम रहा।

आठवें दौर की बैठक 4 जनवरी को हुई।

करीब 4 घंटे बैठक में किसान कानून वापसी की मांग पर अड़े रहे और फिर से बैठक बेनतीजे साबित हुई। मीटिंग खत्म होने के बाद कृषि मंत्री ने कहा ताली दोनों हाथों से बजती है।

नौवें दौर की बैठक 8 जनवरी को हुई।

फिर बातचीत बेनतीजा रही। किसान नेता बैठक के दौरान जो पोस्टर लाये थे, उन पोस्टर पर गुरुमुखी में लिखा था- मरेंगे या जीतेंगे। साथ ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कहा कि मामला 50% मुद्दों पर अटका हुआ है।